जमीयत उलेमा दिल्ली का चुनाव संपन्न
मौलाना मुहम्मद क़ासिम नूरी अध्यक्ष निर्वाचित, चार उपाध्यक्ष और ख़ाज़िन का भी चयन
मुख्य संवाददाता
सुष्मा रानी
नई दिल्ली : जमीयत उलेमा प्रांत दिल्ली का चुनाव आज जमीयत उलेमा–ए–हिंद के केंद्रीय कार्यालय स्थित मदनी हॉल, दिल्ली में शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। चुनावी प्रक्रिया की निगरानी जमीयत उलेमा–ए–हिंद (प्रांत दिल्ली) के चुनावी बोर्ड के सम्मानित सदस्यों मौलाना क़ारी शौकत अली, मौलाना मुहम्मद यह्या करीमी, मौलाना मुहम्मद आक़िल और मौलाना मुफ़्ती ज़फ़र क़ासमी ने की। इस प्रकार अध्यक्ष जमीयत उलेमा–ए–हिंद मौलाना महमूद असद मदनी के नेतृत्व में लगभग एक वर्ष से चल रही सदस्यता और चुनावी मुहिम अपने समापन तक पहुँची।
चुनावी सत्र सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जबकि मग़रिब की नमाज़ के बाद मतगणना (काउंटिंग) की प्रक्रिया आरंभ होकर रात 9 बजे तक जारी रही। इस अवसर पर महासचिव जमीयत उलेमा–ए–हिंद मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने समय–समय पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
मौलाना मुहम्मद क़ासिम नूरी भारी बहुमत से अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उपाध्यक्ष पदों के लिए मौलाना मुहम्मद अख़लाक़ क़ासमी (मुस्तफ़ाबाद), क़ारी अब्दुल ग़फ़्फ़ार (मुहतमिम, मदरसा बैतुल उलूम, जाफ़राबाद), मुफ़्ती ख़लील अहमद क़ासमी और क़ारी मुहम्मद आरिफ़ क़ासमी बहुमत से सफल घोषित हुए। वहीं ख़ाज़िन के पद पर क़ारी मुहम्मद सलीम (मेहरौली) का चयन किया गया।
चुनाव के लिए एक औपचारिक और सुदृढ़ व्यवस्था बनाई गई थी, जिसके अंतर्गत मतदान और सत्यापन (वेरिफ़िकेशन) की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, संगठित और प्रभावी ढंग से संपन्न हुई। दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मतदाता (अरकान–ए–मुन्तज़िमा) उपस्थित हुए और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस बार प्रांत दिल्ली के चुनाव में 1200 से अधिक सदस्य शामिल थे, जिनमें से लगभग 800 सदस्यों ने मतदान किया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में प्रारंभिक सदस्यों की संख्या लगभग सात लाख थी, जबकि सक्रिय (एक्टिव) सदस्यों की संख्या 1500 से अधिक रही।
उल्लेखनीय है कि पिछले दो कार्यकालों में मौलाना मुहम्मद आबिद क़ासमी प्रांत दिल्ली के अध्यक्ष रहे। इस बार वे चुनाव में सफल नहीं हो सके। तथापि, उनके कार्यकाल में जमीयत उलेमा, प्रांत दिल्ली ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं—विशेष रूप से दो आदर्श ज़िलों के गठन और संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे। कुल मिलाकर उनका कार्यकाल सकारात्मक रहा और संगठन की मजबूती में उनकी सेवाएँ सराहनीय रहीं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें